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‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (पीएम-आशा) को मिली मंज़ूरी 
Sep 13, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन।
(खंड- 01 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।)
(खंड- 02 : समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।)
(खंड- 08 : प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशुपालन संबंधी अर्थशास्त्र।)

Agriculture

चर्चा में क्यों?

सरकार की किसान अनुकूल पहलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ अन्नदाता के प्रति अपनी जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नई समग्र योजना ‘प्रधानमंत्री अन्न्दाता आय संरक्षण अभियान’ (Pradhan Mantri Annadata Aay SanraksHan Abhiyan- PM-AASHA) को मंज़ूरी दे दी है। यह किसानों की आय के संरक्षण की दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाया गया एक असाधारण कदम है जिससे किसानों के कल्याण हेतु किये जाने वाले कार्यों में अत्यधिक सफलता मिलने की आशा है। 

उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिये उचित मूल्य दिलाना है, जिसकी घोषणा वर्ष 2018 के केंद्रीय बजट में की गई है।

पीएम- आशा के प्रमुख घटक

  • नई समग्र योजना में किसानों के लिये उचित मूल्य सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है और इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं
    ♦ मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme-PSS)
    ♦ मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (Price Deficiency Payment Scheme- PDPS)
    ♦ निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट योजना (Private Procurement & Stockist Scheme- PPSS)

मूल्य समर्थन योजना : 

  • इसके तहत दालों, तिलहन और गरी (Copra) की भौतिक खरीदारी राज्य सरकारों के सक्रिय सहयोग से केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा की जाएगी।
  • यह भी निर्णय लिया गया है कि नैफेड के अलावा भारतीय खाद्य निगम (FCI) भी राज्यों/ज़िलों में PSS परिचालन की जिम्मेदारी संभालेगा। 
  • खरीद पर होने वाले व्यय और खरीद के दौरान होने वाले नुकसान को केंद्र सरकार मानकों के मुताबिक वहन करेगी।

मूल्य न्यूनता भुगतान योजना

  • इसके तहत उन सभी तिलहनी फसलों को कवर करने का प्रस्ताव किया गया है जिसके लिये MSP को अधिसूचित कर दिया जाता है। 
  • इसके तहत MSP और बिक्री/औसत मूल्य के बीच के अंतर का सीधा भुगतान पहले से ही पंजीकृत उन किसानों को किया जाएगा जो एक पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के ज़रिये अधिसूचित बाज़ार में अपनी उपज की बिक्री करेंगे।
  • समस्त भुगतान सीधे किसान के पंजीकृत बैंक खाते में किया जाएगा। 
  • इस योजना के तहत फसलों की कोई भौतिक खरीदारी नहीं की जाती है क्योंकि अधिसूचित बाज़ार में बिक्री करने पर MSP और बिक्री/औसत मूल्य में अंतर का भुगतान किसानों को कर दिया जाता है। 
  • PDPS के लिये केंद्र सरकार द्वारा सहायता, तय मानकों के अनुसार दी जायेगी।

निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट योजना

  • तिलहन के मामले में यह निर्णय लिया गया है कि राज्यों के पास यह विकल्प रहेगा कि वे चुनिंदा ज़िला/ज़िले की APMC (Agriculture Produce Market Committee) में प्रायोगिक आधार पर निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट योजना (PPSS) शुरू कर सकते हैं जिसमें निजी स्टॉकिस्टों की भागीदारी होगी। 
  • प्रायोगिक आधार पर चयनित ज़िला/ज़िले की चयनित APMC तिलहन की ऐसी एक अथवा उससे अधिक फसलों को कवर करेगी जिसके लिये MSP को अधिसूचित किया जा चुका है। 
  • चूँकि यह योजना अधिसूचित जिंस की भौतिक खरीदारी की दृष्टि से PSS से काफी मिलती-जुलती है, इसलिये यह प्रायोगिक आधार पर चयनित ज़िलों में PSS/PDPS को प्रतिस्थापित करेगी।
  • जब भी बाज़ार में कीमतें अधिसूचित MSP से नीचे आ जाएंगी तो चयनित निजी एजेंसी PPSS से जुड़े दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए पंजीकृत किसानों से अधिसूचित अवधि के दौरान अधिसूचित बाज़ारों में MSP पर जिंस की खरीदारी करेगी। 
  • यह व्यस्था तब अमल में लाई जाएगी जब निजी चयनित एजेंसी को बाज़ार में उतरने के लिये राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सरकार द्वारा अधिकृत किया जाएगा और अधिसूचित MSP के 15 प्रतिशत तक अधिकतम सेवा शुल्क देय होगा।

व्यय :

  • कैबिनेट ने 16,550 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सरकारी गारंटी देने का फैसला किया है जिससे यह यह गारंटी बढ़कर 45,550 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुँच गई है।
  • इसके अलावा, खरीद परिचालन के लिये बजट प्रावधान भी बढ़ा दिया गया है और पीएम-आशा के क्रियान्वयन के लिये 15,053 करोड़ रुपए मंज़ूर किये गए हैं। 

किसानों के हित में कैबिनेट द्वारा लिये गए अन्य फैसले

न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि : 

  • सरकार उत्पादन लागत का डेढ़ गुना तय करने के सिद्धांत पर चलते हुए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों (MSP) में पहले ही वृद्धि कर चुकी है। 
  • MSP में वृद्धि के कारण राज्य सरकारों के सहयोग से खरीद व्यवस्था को काफी बढ़ावा मिलेगा जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

DFPD के साथ-साथ कपड़ा मंत्रालय की वर्तमान योजनाओं को जारी रखने का फैसला :

  • धान, गेहूँ एवं पोषक अनाजों/मोटे अनाजों की खरीद के लिये खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (Department of Food and Public Distribution- DFPD) की अन्य मौजूदा योजनाओं के साथ-साथ कपास एवं जूट की खरीद के लिये कपड़ा मंत्रालय की अन्य वर्तमान योजनाएँ भी जारी रहेंगी, ताकि किसानों के लिये इन फसलों की MSP सुनिश्चित की जा सके।

खरीद हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने का फैसला:

  • कैबिनेट के अनुसार, खरीद परिचालन में प्रायोगिक तौर पर निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित करने की ज़रूरत है, ताकि इस दौरान मिलने वाली जानकारियों के आधार पर खरीद परिचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सके। 

नया बाज़ार ढाँचा स्थापित करने का प्रयास 

  • किसानों के लिये एक नया बाज़ार ढाँचा स्थापित करने के लिये भी प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि उनकी उपज का उचित या लाभकारी मूल्य दिलाया जा सके। 
  • इनमें ग्रामीण कृषि बाज़ारों की स्थापना करना भी शामिल है, ताकि खेतों के काफी निकट ही 22,000 खुदरा बाज़ारों को प्रोत्साहित किया जा सके। 

सरकार की किसान अनुकूल अन्य पहलें :

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
  • परंपरागत कृषि विकास योजना 
  • मृदा स्वास्थ्य कार्डों का वितरण
  • मॉडल कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम, 2017 और मॉडल अनुबंध खेती एवं सेवा अधिनियम, 2018।

स्रोत : द हिंदू एवं पी.आई.बी


Helpline Number : 87501 87501
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